मुफ्त का एहसान न लेना दोस्तो, दिल अभी और भी सस्ते होंगे !!

क्यूँ करता है ये तुमसे इतनी बेपनाह मोहब्बत, हो जाती है इस बात पे दिल से नफ़रत कभी कभी !!

मेरी जिन्दगी का सबसे हसीन पल भी तुम हो और गमगीन पल भी तुम हो, क्युंकि तुम्हे चाह तो सकता हूँ पर पा नहीं सकता !!

आँधियों में भी जो जलता हुआ मिल जाएगा, उस दिए से पूछना मेरा पता मिल जाएगा !!

जिंदगी की आधी शिकायतें यूँ ही दूर हो जायें अगर लोग लोग एक दुसरे के बारे में बोलने की बजाये एक दूसरे से बोलना सीख जाएँ !

तेरे झख्म मेरी तडप से हारे है, मेरी आँख में तेरे आसु भरे है !!

ऐ मोहब्बत तू शर्म से डूब मर, तू एक शख्स को मेरा ना कर सकी !!

अजीब हादसा थी मोहब्बत तेरी, मैं बच भी गया और जिन्दा भी नहीं !!

नहीं करेगे आज के बाद कभी मन्नते तुम्हारी, खुदा जब राजी होगा तब तुम तो क्या हर चीज़ मेरी होगी !!

पानी में तैरना सीख लीजिये मेरे दोस्तो, आँखों में डूबने का अंजाम बुरा होता है !!

मोहब्बत में उनकी मैंने खो दिया वजूद, पर उनकी ख़ुशी कहीं और थी मौजूद !!

कहीं तुम भी न बन जाना किरदार किसी किताब का, लोग बड़े शौक से पड़ते है कहानिया बेवफाओं की !!

कितने सालों के इंतज़ार का सफर खाक हुआ । उसने जब पूछा “कहो कैसे आना हुआ”।

फिर किसी ग़म ने पुकारा है शायद, कुछ उजाला सा हुआ है दिल में !!

इतना भी प्यार किस काम का, भूलना भी चाहो तो नफरत की हद तक जाना पड़े !!

तुझे पाने की चाह में ईतना कुछ खो गया की, अब तू मिल भी जाय तो अफसोस होगा !!

कितने सितम करोगे इस टुटे हुए दिल पर, किसी रोज थक कर बताना जरूर मेरा जुर्म क्या था !!

चलो छोडो तुम्हे क्या बताना महोब्बत के दर्द को, जान जाओगे तो जान से जाओगे !!

हँसकर दर्द छुपाने की कारीगरी मशहूर थी मेरी, पर कोई हुनर काम नहीं आता जब तेरा नाम आता है !!

मेरी तलाश ख़त्म हुई, वो औरो को मिल गया, मुझे एक और नाकामी एक और दर्द मिल गया !!

तकदीर ने जैसा चाहा ढल गये हम, यूं तो संभल कर चले थे फिर भी फिसल गये हम !!

मैं तो बस आपके साथ चलना चाहता था, पर आपने बदनाम कर दिया की पीछा करते हो !!

जिस नगर भी जाएँ किस्से है कमबख्त दिल, की कोई ले के रो रहा है, कोई दे के रो रहा है !!

ना आह सुनाई दी, ना तड़प दिखाई दी, बर्बाद हो गए तेरे इश्क में हम, बड़ी खामोशी के साथ !!

हो सके तो अब की बार कोई सौदा न करना, मैं पिछली मोहब्बत में सब हार आया हूँ !!

हम रोज उदास होते है और शाम गुजर जाती है, किसी रोज शाम उदास होगी और हम गुजर जायेंगे !!

मैंने तेरे इश्क़ में हर रीत बदल दी जीने की पर, आज तक तूने वो अदा नहीं बदली हर किसी से दिल लगाने की !!

हां और ना दोनों एक ही शब्द है, जिन्हे जवाब मिला वो बर्बाद ही हुआ है !!

कैसे लिखु तेरा नाम बेवफा, ये कलम भी तो तेरे नाम की दीवानी है !!

पहला प्यार तो नादानी थी मेरी, मगर वो नादानी आज भी पसंद है मुझे !!

बस यही सोचकर छोड़ दी जिद हमने मोहब्बत की, अश्क तेरे बहे या मेरे, रोएगी तो मोहब्बत ही !!

मेरे‬ ‪‎आँसुओ‬ ‪‎की‬ ‪‎गवाही‬ ‪‎ना‬ ‪‎लेना‬, ‪‎ तेरे‬ ‪‎ज़ुल्मो‬ की ‪‎कहानी‬ ‪‎बिखर‬ ‪‎जायेगी‬ !!

इस अजनबी दुनिया में किसी से दिल न लगाना, सुना है बिन बुलाये आने वाले बिन बताये ही चले जाते है !!

शायद दिल टूटने के लिए ही बना है।

ये इश्क प्यार मोहब्बत शौक अमीरो के है साहेब, हम गरीब तो केवल खेलने के काम आते है इनके !!

हम भी फूलों की तरह अक्सर तनहा ही रहते है, कभी खुद से टूट जाते है तो कभी कोई और तोड़ जाता है !!

एक पल में जो बर्बाद कर देते है दिल की बस्ती को, वो लोग देखने में अक्सर मासूम होते है !!

अपने उसूल कभी यूँ भी तोड़ने पड़े, खता उसकी थी हाथ मुझे जोड़ने पड़े !!

कभी कभी किसी का ध्यान आकर्षित करने का सबसे बेहतर तरीका उस व्यक्ति पर ध्यान ना देना ही होता है !

तडपता हूँ नींद के लिए तो यह दुआ निकलती है बहुत, बुरी चीज़ है मुहब्बत किसी दुश्मन को भी न हो !!

वो भी हमारी ख़ामोशी पर शक करने लगे, जिनको हमारा बोलना कभी पसंद हीं नहीं था !!

तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे, मगर अब आँख भर आती है तुम नजर नहीं आते हो !!

जिस फूलों की परवरिश हमने अपनी मोहब्बत से की, जब वो खुशबु के काबिल हुए तो औरो के लिए महेकने लगे !!

इतनी वफ़ादारी ना कर किसी से यूँ मदहोश होकर, दुनिया वाले एक खता के बदले सारी वफ़ाएं भुला देते है !!

ना कोई हमदर्द था, ना ही कोई दर्द था, फिर एक हमदर्द मिला, उसी से सारा दर्द मिला !!

इतनी खामोश मोहब्बत क्यूँ करते हो हमसे, लोग कहते है की इस बदनसीब का कोई भी नहीं !!

मुझे बहुत प्यारी है तुम्हारी दी हुई हर एक निशानी, चाहे वो दिल का दर्द हो या आँखों का पानी !!

रिश्तों की डोरी तब कमजोर होती है जब इंसान ग़लतफहमी में पैदा होने वाले सवालों का जवाब खुद ही बना लेता है !

मैंने ज़िन्दगी से कुछ नहीं माँगा तेरे सिवा, और ज़िन्दगी ने मुझे सब कुछ दिया तेरे सिवा !!

सुना है इश्क़ से तेरी बहुत बनती है, एक एहसान कर उस से क़ुसूर पुछ मेरा !!

तुम्हे क्या पता की किस दर्द में हूँ मैं, जो लिया नही, उस कर्ज में हूँ मैं !!

रात को सोते हुए एक बेवज़ह सा ख़याल आया, सुबह उठ न पाऊँ तो क्या उसे ख़बर मिलेगी कभी !!

ना जाने कौन उन्हे पास आने से रोकता है, वर्ना हम तो यहाँ पलके बिछाए बैठे है !!

आज उदासी ने भी हाथ जोड़कर कहा मुझसे, तुझे तेरे प्यार का वास्ता मेरा आसियाना छोड !!

क़ुछ इस तरह से नाराज है वो हमसे, जैसे उन्हे किसी और ने मना लिया हो !!

बस रिश्ता ही तो टूटा है, मोहब्बत‬ तो आज भी हमे उनसे है !!

वो सीखकर गयी है मोहब्बत मुझसे, जिससे भी करेगी बेइंतहा बेमिसाल करेगी !!

सुना था ख़ुशी चेहरे पे एक नूर ले आती है, मेरे चेहरे की सब रौनक तो तेरे दर्द से है !!

मैने देखा है ज़माने को शराबे पी कर, दम निकल जाये अगर होश में आकर देखूँ !!

आज लोग इज्जत से भाई कहकर बुलाते है, फिर भी वो सुकुन नहीं मिलता जो वो प्यार से पागल कहती थी !!