हमारे दुश्मनों को हमारे सामने सर उठाने की हिम्मत नही और वो पगली दिल से खेल कर चली गयी.

तुमने मजबूर किया हम मजबूर हो गये ,तुम बेवफा निकले हम मशहूर हो गये .

ज़ख़्म दे कर ना पूछा करो दर्द की शिद्दत, दर्द तो दर्द होता है थोड़ा क्या, ज्यादा क्या !!

तेरा नाम लेकर शहर में ढुंढता हुँ कोई बताता नहीं, मेरा हाल बताकर शहर में पुछो घर बता देगें !!

तेरी जुल्फे इशारो में कह गयी मुझे, मैं भी शामिल थी तुझे बर्बाद करने में !!

मत कर इतना गुरुर खुद पर… हमने चाहना छोड़ दिया. तो लोग पूछना भी छोड़ देंगे.

तेरे रोने का कोई फायदा नहीं ए दोस्त, हसीन लोग अक्सर बे-दर्द हुवा करते है !!

गलत कहते है लोग की सफेद रंग में वफा होती है यारो, अगर ऐसा होता तो आज नमक जख्मो की दवा होती !!

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो, और फिर कश्ती का बोझ कहकर हमें ही उतारा गया !!

घर बना कर मेरे दिल में वो चली गई है, ना खुद रहती है और ना किसी और को बसने देती है !!

हो गई थी दिल को कुछ उम्मीद सी तुमसे खैर तुमने जो किया अच्छा किया.

उमर बीत गई पर एक जरा सी बात समझ में नहीं आयी, हो जाए जिनसे मोहब्बत वो लोग कदर क्यों नहीं करते !!

अगर मैं भी मिजाज़ से पत्थर होता..तो खुदा होता या तेरा दिल होता.

कभी बंद आँखों से पढ़ लेते थे, तुम मेरे साये की आवाज को भी.. और आज भरी महफ़िल में, मेरे नाम को अनसुना सा कर देते हो.

कुछ सोचना चाहिए था उसे हर सितम से पहले, मैं सिर्फ दीवाना नहीं था, इन्सान भी था !!

“”वफादार और तुम…?? ख्याल अच्छा है. बेवफा और हम…?? इल्जाम भी अच्छा है.””

वो अपनी गली की रानी होने का गरूर करती है ,नादान ,ये नहीँ जानती कि हम उसी शहर के बादशाह है .

मेरा कुछ ना ऊखाड सकोगे तुम मुझसे दुश्मनी करके,मुझे बर्बाद करना चाहते हो तो, मुझसे मोहब्बत कर लो.

उठाकर फूल की पत्ती उसने बङी नजाकत से मसल दी,इशारो इशारो मेँ कह दिया की हम दिल का ये हाल करते है.

लफ्जो मे गर बयां हो जाती मोहब्बत मेरी तो आज वो बेवफा ना होता.

मुझे मालूम था कि वो रास्ते कभी मेरी मंजिल तक नहीं जाते थे,फिर भी मैं चलता रहा क्यूँ कि उस राह में कुछ अपनों के घर भी आते थे!

मौसम की तरह बदलते है उस के वादे इरादे, उपर से ये ज़िद है कि तुम मुझ पे एतबार करो.

हमने गुज़रे हुए लम्हों का हवाला जो दिया,हँस के वो कहने लगे रात गई बात गई.

अगर मैं मर भी जाऊँ तो उसे खबर ना करना यारो, अगर वो रो उठी तो ये दिल फिर से धडक उठेगा !!

मेरा रब भी रूठा है मुझसे शायद, मैं तुझे मांगू भी तो किससे !!

एक बात पूछूं जवाब मुस्कुरा के देना ,मुझे रुला कर तुम खुश तो होना ?

तीन लफ़्ज़ की हिफाजत नहीं कर सके, उसके हाथो जिंदगी की पूरी किताब क्या देते !!

बेगाना हमने तो नहीं किया किसी को… लेकिन जिसका दिल भरता गया वो दूर जाता गया !

तेरी आंखो का इजहार में पढ सक्ता हुं पगली, कीसी को अलविदा युं मुस्कुराकर नहीं कहते !!

वो बड़े ताजूब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह,फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा मोहब्बत की थी ना ?

उस फिजा में भी जलता रहा मैं किसीके लिए, जहां चिराग भी तरसते थे रौशनी के लिए !!

अपने कर्म से वो मेरा मुक़द्दर बना गए, एक क़तरे को पल में समुन्दर बना गए, फूलों से भी ज्यादा नरम था, कभी दिल ये मेरा, इतना तड़पाया उसने कि पत्थर बना गए..

बरसों पहले अलविदा कह गयी थी जो कल फिर मिली बाजार में, उसकी गाड़ी बड़ी थी और मेरी दाढ़ी.

मुझे ढुंढने की कोशिशे अब मत किया कर,तुने रास्ता बदला तो हमने मंजिल।

अचानक चौंक उठे नींद से हम, किसी ने शरारत से कह दिया की सुनो वो मिलने आई है !!

पता है हार जाऊंगा इश्क़-ए-शतरंज में, फिर भी हर चाल ऐसे चलता हूँ की अपनी रानी से दूर ना रहूँ !!

रहते थे कभी जिनके दिल में हम अजीजों की तरह ,बैठे हैं हम आज उनके दर पे फकीरों की तरह .

छोड़ दिया हमने उसका दीदार करना हमेशा के लिए ,‘दोस्त’ जिसको प्यार की कदर ना हो उसे मुड़ मुड़ के क्या देखना .

चली जाने दो उसे किसी ओर की बाहों मे ,इतनी चाहत के बाद जो मेरी ना हुई, वो किसी ओर कि क्या होगी.

ये मौसम बारिश का अब पसंद नहीं मुझे ए खुदा, मेरे अपने आंसू ही बहूत है भीग जाने के लिये !!

आँसु बड़े बेवफा होते है, उसे तो आँखो से दूर होने का बहाना चाहिए !!

ना होना बेमुरव्वत, ना दिखाना बेरुखी,बस सादगी से कहना के ‘बोझ बन गये हो तुम’.

आज कुछ नही है मेरे पास लिखने के लिए, शायद मेरे हर लफ्ज़ ने खुद-खुशी कर ली !!

अब शिकायतेँ तुम से नहीँ खुद से है, माना के सारे झूठ तेरे थे.लेकिन उन पर यकिन तो मेरा था.

फ़िक्र तो तेरी आज भी करते हैं ,बस जिक्र करने का हक़ नही रहा.

वो अपना काम निकालते हैं कुछ इस हुनर से कि आप धोखे खाकर भी उनसे मिला करते हैं.

दिलासा देते है लोग की यूँ हर वक्त रोया न करो, मैं कैसे बताऊँ की कुछ दर्द सहने के काबिल नहीं होते !!

टूटे हुए सपनो और छुटे हुए अपनों ने मार दिया ,वरना ख़ुशी खुद हमसे मुस्कुराना सिखने आया करती थी.

मुझें छोड़कर वो खुश हैं तो शिकायत कैसी, अब मैं उन्हें खुश भी न देखूं तो मोहब्बत कैसी.

संवर रही है अब वो किसी और के लिए,पर मैं बिखर रहा हूँ आज भी उसी के लिए.

मेरी जिन्दगी में एक एसा भी शख्स है यारों, जो मेरी पूरी जिन्दगी है और मैं उसका एल लम्हा भी नहीं !!

टुकड़े पड़े थे राह में किसी हसीना की तस्वीर के,लगता है कोई दीवाना आज समझदार हो गया.

वो दिन जो गुजरे तुम्हारे साथ, काश जिंदगी भी उतनी ही होती !!

मर्ज़ी से जीने की बस ख्वाहिश की थी मैंने, और वो कहते है की खुदगर्ज़ बन गए हो तुम !!

गुज़र गया आज का दिन पहले की तरह ना हम को फुरसत मिली ना उनको ख्याल आया .

बहल तो जाता उसके झूठे वादों से मेरा दिल लेकिन कब तक चलती पानी मे, काग़ज की कश्तियाँ.

उंगलिया आज भी इस सोच में गुम है , उसने कैसे नए हाथ को थामा होगा.

जिसे मैं खोना नहीं चाहता, वो मेरा होना नहीं चाहता !!

धोखा देती है अक्सर मासूम चेहरे की चमक,हर काँच के टुकड़े को हीरा नहीं कहते.

आज वो जुदा इसलिये है, शायद किसीने मेरे प्यार का अंजाम सोच रखा था.